उत्तराखण्ड
क्या 2027 में फिर लहराएगा BJP का परचम? धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड की सियासत में बड़ा मुकाबला
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति अब धीरे-धीरे 2027 विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ रही है। सत्तारूढ़ भाजपा लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं कांग्रेस भी सरकार को घेरने और सत्ता में वापसी के लिए सक्रिय हो चुकी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या 2027 में भाजपा एक बार फिर उत्तराखंड में अपना परचम लहरा पाएगी और क्या पुष्कर सिंह धामी इस चुनाव में पार्टी का चेहरा बनकर फिर सरकार बनाने में सफल होंगे?
राजनीतिक संकेतों के मुताबिक भाजपा 2027 का चुनाव मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है। अगस्त 2026 में सामने आई रिपोर्टों में भी भाजपा की ओर से धामी को चुनावी नेतृत्व देने के संकेत बताए गए हैं। हालांकि उनकी विधानसभा सीट को लेकर अंतिम तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है।
2022 में भाजपा ने रचा था इतिहास
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 70 में से 47 सीटें जीतकर लगातार दूसरी बार सरकार बनाई थी। उत्तराखंड के राजनीतिक इतिहास में लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी भाजपा के लिए बड़ी उपलब्धि रही।
हालांकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद खटीमा सीट से चुनाव हार गए थे। इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाए रखा और बाद में चंपावत उपचुनाव जीतकर उन्होंने विधानसभा में वापसी की। उत्तराखंड सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार धामी राज्य के ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद संभाला है।
धामी सरकार के काम बन सकते हैं चुनावी मुद्दा
भाजपा के पक्ष में सबसे बड़ा तर्क सरकार के पिछले कार्यकाल के कामों को माना जा सकता है। सरकार की ओर से निवेश, सड़क और रेल कनेक्टिविटी, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, धार्मिक स्थलों के विकास और सीमांत क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर कई योजनाओं को आगे बढ़ाने का दावा किया गया है।
राज्य सरकार के अनुसार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में ₹3.56 लाख करोड़ के एमओयू हुए, जिनमें से ₹1 लाख करोड़ से अधिक के निवेश को जमीन पर उतारने का दावा किया गया है। जमरानी बांध, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना और किच्छा में एम्स सैटेलाइट सेंटर जैसे प्रोजेक्ट भी सरकार की उपलब्धियों में गिनाए जा रहे हैं।
2026-27 के बजट में भी पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर ₹18,153 करोड़ करने का प्रावधान किया गया है, जो पिछले संशोधित अनुमान से 22 प्रतिशत अधिक है।
UCC और सख्त कानूनों का मुद्दा
धामी सरकार ने समान नागरिक संहिता यानी UCC को लागू करने के साथ-साथ भर्ती परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए सख्त कानून और अन्य कानूनों को भी अपनी प्रमुख उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत किया है। सरकार के अनुसार भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के प्रयासों के बीच चार वर्षों में 30 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली।
भाजपा चुनाव में इन फैसलों को अपनी सरकार की निर्णायक कार्यशैली के रूप में जनता के सामने रख सकती है।
लेकिन राह आसान नहीं होगी
2027 में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती एंटी-इनकंबेंसी की संभावित भावना होगी। लगातार सत्ता में रहने के बाद जनता के बीच स्थानीय विधायक, बेरोजगारी, महंगाई, पलायन, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहेंगे।
कांग्रेस ने भी चुनावी तैयारी तेज कर दी है और सरकार के खिलाफ आंदोलन तथा जनसंपर्क अभियान बढ़ाने के संकेत दिए हैं। हाल में कांग्रेस नेताओं ने कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और सरकार की नीतियों को लेकर भाजपा पर हमला बोला है।
यानी मुकाबला सिर्फ भाजपा बनाम कांग्रेस नहीं होगा, बल्कि सरकार के काम बनाम जनता की अपेक्षाओं के बीच भी होगा।
धामी के सामने सबसे बड़ी चुनौती
पुष्कर सिंह धामी के सामने 2027 में सिर्फ सरकार बचाने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि 2022 की तुलना में बेहतर राजनीतिक प्रदर्शन करने की भी चुनौती होगी।
उनकी राजनीतिक शैली को भाजपा अपेक्षाकृत युवा और सक्रिय नेतृत्व के रूप में प्रस्तुत कर सकती है। दूसरी ओर विपक्ष उनके कार्यकाल के दौरान उठे सवालों को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश करेगा।
धामी के लिए सबसे महत्वपूर्ण होगा कि पहाड़ और मैदान—दोनों क्षेत्रों के मतदाताओं को एक साथ साधा जाए। पहाड़ में पलायन, रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाएं अहम हैं तो तराई में उद्योग, रोजगार, कानून-व्यवस्था और शहरी विकास बड़े मुद्दे हो सकते हैं।
क्या BJP फिर बनाएगी सरकार?
फिलहाल 2027 का परिणाम तय मानना जल्दबाजी होगी। भाजपा के पास सत्ता, संगठन और मुख्यमंत्री के रूप में पुष्कर सिंह धामी का चेहरा है। सरकार अपने विकास कार्यों और बड़े नीतिगत फैसलों को लेकर जनता के बीच जाने की तैयारी कर सकती है।
वहीं कांग्रेस सत्ता विरोधी माहौल को अपने पक्ष में बदलने की कोशिश करेगी।
इसलिए 2027 का चुनाव उत्तराखंड में बेहद दिलचस्प होने वाला है। अगर भाजपा धामी सरकार के काम को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाने, संगठन को मजबूत रखने और स्थानीय स्तर की नाराजगी को दूर करने में सफल रहती है, तो लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी की उसकी संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।
लेकिन अंतिम फैसला जनता के हाथ में होगा।
सवाल अब सिर्फ इतना नहीं है कि भाजपा 2027 में फिर परचम लहराएगी या नहीं—सवाल यह भी है कि क्या पुष्कर सिंह धामी अपने नेतृत्व में भाजपा को उत्तराखंड की सत्ता में लगातार दूसरी बार वापस ला पाएंगे?
2027 का जनादेश इस सवाल का अंतिम जवाब देगा।
