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गर्मी की गिरफ्त में पहाड़ : कितना खतरनाक है प्रकृति का यह इशारा ।।

हल्द्वानी

गर्मी की गिरफ्त में पहाड़ : कितना खतरनाक है प्रकृति का यह इशारा ।।

पंखे ,कूलर ,AC से दूर रहने वाला पहाड़ भी अब इससे दूर नहीं

हल्द्वानी – देश में इस बार गर्मी सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, इतनी तगड़ी गर्मी है कि लोग मर रहे हैं, पूरा उत्तर भारत भीषण गर्मी से जूझ रहा है, पहाड़ों पर भी गर्म हवाएं लोगों को परेशान कर रही हैं, पंखे ,कूलर ,ac से दूर रहने वाला पहाड़ भी अब इससे दूर नहीं है, आलम यह है कि इस बार की गर्मी अब सिर्फ पसीना नहीं बहा रही है बल्कि लोगों की जान भी ले रही है, इसी वजह से हर कोई इसे कातिल कह रहा है।मैं देख रहा हूं हर कोई हाय गर्मी ही कह रहा है । उत्तराखंड के पहाड़ी इलाक़ों में तापमान में बढ़ोतरी लोगों को हैरान-परेशान कर रही है. मैदान तो मैदान पहाड़ी इलाक़ों में भी लोगों को गर्मी से निजात नहीं मिल रही है।

पहाड़ों की रानी अब गर्मी की नानी

हम इस पर विस्तार से बात करेंगे लेकिन पहले आपको पहाड़ ले चलता हूं आज से 5 साल पहले की ही बात करूं तो पहाड़ों में किसी के घर में पंखा तक नहीं होता था लेकिन अब बढ़ रही गर्मी के कारण धीरे-धीरे पहाड़ों में भी यह पहुंच चुके हैं अगर आप नैनीताल भी जाते हैं तो वहां आपको होटल में AC लगा हुआ मिलेगा, यह चिंता का विषय है , पहाड़ो में जिन घरों में आज तक पंखे नहीं लगे हैं लेकिन अब लगता है की जरूरत पड़ गई है एक तरफ इतनी गर्मी दूसरी तरफ नहाने के लिए पानी तक नहीं मिल पा रहा । पहाड़ों की रानी अब गर्मी की नानी बन गई है, इससे साफ़ है ग्लोबल वॉर्मिंग की चपेट में उत्तराखंड की वादियां आ गई हैं ,।

शीतल हवाओं का आनंद उठाने के लिए पहाड़ आने वाले सैलानी भी मायूस

ये दशा पर्यावरणविदों और आम लोगों को चिंता में डाल रही है , देहरादून ,हल्द्वानी में तापमान 40-41 डिग्री जा रहा है ठंडक और शीतल हवाओं का आनंद उठाने के लिए पहाड़ आने वाले सैलानी भी मायूस हुए हैं. जिससे सैलानियों की संख्या में कमी आ गई है, इसका असर स्थानीय कारोबार पर पड़ रहा है. भयंकर गर्मी के कारण इस सीजन के वक्त में भी पर्यटन के कारोबारी उदास महसूस कर रहे हैं , उत्तराखंड में पड़ रही रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने लोगों की मुश्किलें बहुत बढ़ा दी हैं। पहाड़ों पर छुट्‌टियां मनाने पहुंच रहे लोगों को भी भीषण गर्मी के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।। लेकिन पहाड़ियों और सरकारों ने वैज्ञानिकों की बार−बार चेतावनी के बावजूद प्रकृति का दोहन करने की इच्छा को खत्म नहीं किया है।अपने लाभ के लिए मनुष्य विकास के नाम पर कई ऐसे अविष्कार कर रहा है जो जल, जंगल, जमीन में जहर घोल रहे हैं।

प्रकृति के उपहारों का ऐसा दुरूपयोग हुआ कि धरती, आकाश, पाताल से मानव को जो कुछ मिल सकता था उसे लेने में कोई कसर बाकी न रखी। प्रदेश के कई इलाकों में दिन -प्रतिदिन आग से जंगल धधक रहे हैं। पेड़ों का अंधाधुंध कटान हो रहा है।जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से लगातार धरती का तापमान बढ़ रहा है.प्रकृति ने मानव को सभी वस्तुएं दी जिनसे वह किसी न किसी रूप में लाभांवित होता रहा है।परंतु आधुनिकता की दौड़ में इंसान इन प्राकृतिक स्त्रोतों को जानबूझकर स्वयं ही खत्म कर रहा है। जीव, जंतु और वनस्तपति तेजी के साथ खत्म हो रहे हैं और उसका प्रभाव मानव जीवन पर पड़ रहा है। नतीजा सामने है।

ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है तथा ग्लेशियर भी पिघल रहे

ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है तथा ग्लेशियर भी पिघल रहे हैं। आधुनिकता की तेजी से जीवन शैली तो जरूर आसान हुई है परंतु कहीं न कहीं वह मानव जीवन को प्रभावित कर रही है दोस्तों ।कई जीव-जंतु और वनस्पति विलुप्त हो रही हैं। पहले गौरेया चिड़िया जो पहले काफी संख्या में दिखाई देती थी। आज उनकी संख्या काफी कम हो गई है। जंगलों के दहकने से कई जंगली जानवर इसकी चपेट में आ रहे हैं नतीजा यह है कि यह जानवर चिड़ियाघर तक ही सिमट कर रह गए हैं। इसके अलावा तमाम औषधीय पौधे और घास भी विलुप्त होने के कगार पर है। यदि तापमान इसी तेजी से बढ़ता रहा तो ग्लेशियर पिघलेंगे और बाढ़ के रूप में मानव जीवन को प्रभावित करेंगे।

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