उत्तराखण्ड
किच्छा का सियासी संग्राम: बेहड़ बनाम शुक्ला, टकराव के बाद अब 2027 की राह पर निगाहें
किच्छा/ऊधमसिंह नगर।
किच्छा की राजनीति में कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ और भाजपा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के बीच पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता एक बार फिर चर्चा में है। 22 सितंबर को नगर पालिका चुनाव के दौरान स्ट्रांग रूम के बाहर दोनों पक्षों के बीच विवाद और धक्का-मुक्की हुई। बेहड़ ने थप्पड़ मारे जाने का आरोप लगाया, जबकि पूरे घटनाक्रम को लेकर दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की और दोनों नेताओं को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं।
निकाय चुनाव बना प्रतिष्ठा का सवाल
इससे पहले ही किच्छा नगर पालिका चुनाव को दोनों नेताओं की राजनीतिक पकड़ से जोड़कर देखा जा रहा था। बेहड़ ने कांग्रेस प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह के पक्ष में प्रचार किया, जबकि भाजपा की ओर से संदीप अरोड़ा मैदान में थे। मीडिया रिपोर्टों में इस चुनाव को बेहड़ और शुक्ला के समर्थित प्रत्याशियों के बीच मुकाबले के रूप में भी प्रस्तुत किया गया।
मतदान के बाद हुआ विवाद इस राजनीतिक मुकाबले को और ज्यादा सुर्खियों में ले आया है। हालांकि, नगरपालिका चुनाव के परिणाम अभी इस समय उपलब्ध स्रोतों में सामने नहीं आए हैं, इसलिए इस आधार पर किसी नेता की राजनीतिक स्थिति को विजेता या पराजित घोषित करना जल्दबाजी होगी।
तिलक राज बेहड़: मौजूदा विधायक होने के कारण बड़ी जिम्मेदारी
तिलक राज बेहड़ वर्तमान में किच्छा से कांग्रेस विधायक हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने 49,552 वोट हासिल कर राजेश शुक्ला को 10,077 मतों से हराया था।
इसलिए 2027 का विधानसभा चुनाव उनके लिए स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण होगा। उनके सामने एक तरफ मौजूदा विधायक के रूप में अपने काम और क्षेत्रीय पकड़ को जनता के सामने रखने की चुनौती होगी, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस संगठन और स्थानीय राजनीतिक समीकरण भी महत्वपूर्ण होंगे।
हालिया घटनाक्रम के बाद उनके लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि किच्छा की राजनीति को व्यक्तिगत टकराव से आगे ले जाकर स्थानीय विकास, रोजगार, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और नगर क्षेत्र की समस्याओं जैसे मुद्दों पर राजनीतिक विमर्श केंद्रित किया जाए।
राजेश शुक्ला: पूर्व विधायक से संगठन में सक्रिय भूमिका तक
राजेश शुक्ला 2022 में बेहड़ से चुनाव हारने के बावजूद किच्छा की राजनीति में सक्रिय बने हुए हैं। 2022 में उन्हें 39,475 वोट मिले थे।
2026 में भाजपा ने उन्हें प्रदेश की मीडिया टीम में प्रवक्ता के रूप में जगह दी है। यह संकेत देता है कि पार्टी के स्तर पर उनकी राजनीतिक भूमिका केवल किच्छा तक सीमित नहीं रखी गई है और उन्हें संगठन तथा मीडिया संवाद में जिम्मेदारी दी गई है।
इस लिहाज से शुक्ला के लिए आगे की राजनीति में दो स्तर महत्वपूर्ण रहेंगे—किच्छा में अपना जनाधार बनाए रखना और भाजपा संगठन में अपनी भूमिका को मजबूत करना।
दोनों के लिए 2027 क्यों महत्वपूर्ण?
2022 में दोनों आमने-सामने थे और इस बार भी किच्छा की राजनीति में दोनों के बीच सीधा राजनीतिक टकराव दिखाई दे रहा है। लेकिन 2027 में परिस्थितियां बिल्कुल वैसी ही रहेंगी, यह अभी निश्चित नहीं कहा जा सकता। टिकट, पार्टी की रणनीति, स्थानीय समीकरण, प्रत्याशी चयन और निकाय चुनाव के परिणाम जैसे कई कारक आगे तस्वीर बदल सकते हैं।
इसलिए मौजूदा स्थिति को इस तरह समझा जा सकता है:
- बेहड़: मौजूदा विधायक और कांग्रेस के प्रमुख स्थानीय चेहरे के रूप में अपनी राजनीतिक पकड़ तथा सरकार-विरोधी मुद्दों को आगे बढ़ाने की भूमिका में हैं।
- शुक्ला: पूर्व विधायक होने के बावजूद भाजपा संगठन में सक्रिय हैं और पार्टी की मीडिया टीम में उनकी नई भूमिका सामने आई है।
- किच्छा: दोनों नेताओं के लिए स्थानीय संगठन और जनसमर्थन का महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र बना हुआ है।
- 2027: दोनों की अगली राजनीतिक भूमिका पार्टी के निर्णयों और आने वाले चुनावी घटनाक्रम पर निर्भर करेगी; अभी किसी के भविष्य को निश्चित रूप से तय मानना तथ्यात्मक नहीं होगा।
सबसे बड़ा सवाल: टकराव से आगे की राजनीति कौन तय करेगा?
किच्छा में बेहड़ और शुक्ला के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा नई नहीं है। हालिया घटनाक्रम ने इस प्रतिद्वंद्विता को फिर से राज्य की राजनीति के केंद्र में ला दिया है।
अब आने वाले समय में महत्वपूर्ण यह होगा कि दोनों नेता स्थानीय जनता के मुद्दों, संगठनात्मक सक्रियता और राजनीतिक संवाद के जरिए अपनी भूमिका को किस तरह आगे बढ़ाते हैं। 2027 की विधानसभा राजनीति में किच्छा निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण क्षेत्र रहेगा, लेकिन अभी उपलब्ध तथ्यों के आधार पर किसी एक नेता के राजनीतिक भविष्य को निश्चित रूप से तय करना उचित नहीं होगा।
निष्कर्षतः, किच्छा में मुकाबला केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो राजनीतिक संगठनों की स्थानीय ताकत, संगठन और जनसंपर्क का भी परीक्षण है। आने वाले महीनों में निकाय चुनाव के परिणाम, पार्टी की रणनीति और 2027 के टिकट को लेकर होने वाले फैसले इस तस्वीर को और स्पष्ट करेंगे।
