उत्तराखण्ड
डॉ. नारायण सिंह जंतवाल का जाना उत्तराखंड के लिए अपूरणीय क्षति
राज्य आंदोलन के प्रखर योद्धा, पूर्व विधायक और उत्तराखंड क्रांति दल के वरिष्ठ नेता के निधन से प्रदेश में शोक की लहर
नैनीताल। उत्तराखंड की राजनीति और राज्य आंदोलन के इतिहास में अपनी महत्वपूर्ण पहचान रखने वाले डॉ. नारायण सिंह जंतवाल का निधन प्रदेश के लिए अत्यंत दुखद घटना है। उनके जाने से उत्तराखंड ने एक संघर्षशील, विचारशील और जनसरोकारों के प्रति समर्पित व्यक्तित्व को खो दिया है।
डॉ. जंतवाल उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन के प्रमुख स्तंभों में शामिल रहे। पृथक राज्य की मांग को लेकर चले संघर्ष में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आंदोलन के दौरान जेल भी गए। उत्तराखंड क्रांति दल के संस्थापक सदस्यों में शामिल डॉ. जंतवाल ने जीवनभर पहाड़ की अस्मिता, जल-जंगल-जमीन, रोजगार और क्षेत्रीय अधिकारों के सवालों को प्रमुखता से उठाया।
वर्ष 2002 में उत्तराखंड के पहले विधानसभा चुनाव में नैनीताल से विधायक निर्वाचित होकर उन्होंने जनप्रतिनिधि के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभाई। उनका राजनीतिक जीवन केवल सत्ता और पद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रदेश के मूल सवालों और जनहित के मुद्दों से जुड़ा रहा।
‘नशा नहीं, रोजगार दो’ आंदोलन, वनाधिकार और पहाड़ के हितों से जुड़े संघर्षों में उनकी सक्रिय भूमिका हमेशा याद की जाएगी। गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने सहित उत्तराखंड के महत्वपूर्ण मुद्दों पर उनकी मुखरता उनके प्रदेश के प्रति समर्पण को दर्शाती थी।
डॉ. नारायण सिंह जंतवाल का निधन उत्तराखंड राज्य आंदोलन, क्षेत्रीय राजनीति और जनसंघर्षों के लिए एक बड़ी क्षति है। उनके विचार, संघर्ष और योगदान आने वाली पीढ़ियों को उत्तराखंड के प्रति अपने दायित्वों की याद दिलाते रहेंगे।
प्रतिपक्ष संवाद परिवार की ओर से डॉ. नारायण सिंह जंतवाल को भावभीनी श्रद्धांजलि एवं शोकाकुल परिवार के प्रति गहरी संवेदना।





