उत्तर प्रदेश
केदारनाथ में 11,700 फीट की ऊंचाई पर इतिहास भारत में पहली बार नर्व ब्लॉक से घायल श्रद्धालु को मिली दर्द से तत्काल राहत।
नोयडा:केदारनाथ धाम में आधुनिक चिकित्सा और मानव सेवा का एक अनूठा उदाहरण देखने को मिला, जब लगभग 11,700 फीट की ऊंचाई पर एक घायल महिला श्रद्धालु को उन्नत क्षेत्रीय एनेस्थीसिया (Regional Anaesthesia) तकनीक द्वारा कुछ ही मिनटों में असहनीय दर्द से राहत दिलाई गई।
महिला श्रद्धालु केदारनाथ यात्रा के दौरान घोड़े से गिर गई थीं, जिससे उनके हाथ की ह्यूमरस (भुजा की मुख्य हड्डी) में फ्रैक्चर हो गया। चोट के कारण वह अत्यधिक दर्द से पीड़ित थीं और हाथ को हल्का सा हिलाना भी उनके लिए असहनीय था। ऐसी स्थिति में फ्रैक्चर को सही स्थिति में लाना और प्लास्टर करना अत्यंत कठिन हो रहा था।
इसी दौरान जीआईएमएस (GIMS), ग्रेटर नोएडा के एनेस्थीसियोलॉजिस्ट एवं स्वामी विवेकानंद हेल्थ मिशन सोसाइटी (SVHM) के स्वयंसेवी चिकित्सक डॉ. विनय ने एक उन्नत सुप्राक्लेविकुलर ब्रैकियल प्लेक्सस नर्व ब्लॉक किया। यह विशेष तकनीक हाथ की नसों को अस्थायी रूप से सुन्न कर देती है, जिससे कुछ ही मिनटों में रोगी का दर्द पूरी तरह समाप्त हो गया।
दर्द से राहत मिलने के बाद मरीज पूरी तरह सहज और सहयोगी हो गईं, जिसके बाद चिकित्सकों ने सुरक्षित रूप से फ्रैक्चर को सही स्थिति में लाकर प्लास्टर चढ़ाया। यह पूरी प्रक्रिया बिना अतिरिक्त पीड़ा दिए सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
केदारनाथ जैसे दुर्गम और उच्च हिमालयी क्षेत्र में इस प्रकार की उन्नत क्षेत्रीय एनेस्थीसिया तकनीक का सफल उपयोग भारतीय पर्वतीय चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह स्वामी विवेकानंद चैरिटेबल हॉस्पिटल की बढ़ती चिकित्सा क्षमताओं को भी दर्शाता है, जो देश के सबसे कठिन और दूरस्थ क्षेत्रों में आने वाले श्रद्धालुओं को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है।
हर वर्ष केदारनाथ यात्रा के दौरान फिसलन भरे मार्ग, घोड़े-खच्चरों से होने वाली दुर्घटनाएं, प्रतिकूल मौसम और कठिन पर्वतीय परिस्थितियों के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु घायल होते हैं। ऐसे में उन्नत दर्द-नियंत्रण तकनीकों का उपयोग पर्वतीय क्षेत्रों में ट्रॉमा देखभाल की गुणवत्ता को नई दिशा दे सकता है।
डॉ. विनय ने कहा, “11,700 फीट की ऊंचाई पर, जहां हर सांस महत्वपूर्ण होती है और हर कदम चुनौतीपूर्ण, वहां दर्द से राहत देना केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि सेवा (सेवा भाव) है।”
यह प्रेरणादायक चिकित्सीय हस्तक्षेप दर्शाता है कि समर्पण, विशेषज्ञता और करुणा के माध्यम से विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं भगवान केदारनाथ के धाम तक पहुंचाई जा सकती हैं।
