उत्तर प्रदेश
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी
कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने उच्च शिक्षा में बहुविषयक दृष्टिकोण को बताया समय की मांग
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के शिक्षा विभाग द्वारा “Reimagining Higher Education: Multidisciplinary Approaches for Quality, Equity and Global Excellence” विषय पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने विशिष्ट अतिथि के रूप में सहभागिता की।
अपने ओजस्वी एवं प्रेरक व्याख्यान में प्रो. लोहनी ने कहा कि वर्तमान समय में उच्च शिक्षा को नई दिशा देने के लिए बहुविषयक एवं अंतर्विषयक दृष्टिकोण को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समान अवसर तथा वैश्विक उत्कृष्टता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षण–अधिगम की पद्धतियों में नवाचार, अनुसंधान को प्रोत्साहन तथा तकनीकी समावेशन पर विशेष बल देना होगा।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप लचीली, समावेशी एवं कौशल-आधारित शिक्षा प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों को व्यापक ज्ञान, व्यावहारिक दक्षता तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम बनाया जा सकेगा।
प्रो. लोहनी ने इस अवसर पर उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय से दोहरी उपाधि (ड्यूल डिग्री) कार्यक्रम तथा ‘स्वयं’ के अंतर्गत उपलब्ध मूक्स (MOOCs) पाठ्यक्रमों के माध्यम से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दूरस्थ शिक्षा अब नवाचार और कौशल विकास के लिए विशेष रूप से समर्पित है तथा उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
संगोष्ठी में देश-विदेश के अनेक विशेषज्ञों ने सहभागिता की। इस अवसर पर प्रो. एच. सी. एस. राठौर (वर्तमान अध्यक्ष, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद), पूर्व एनसीटीई अध्यक्ष एवं कुलपति जे. एस. राजपूत, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला तथा स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग, दिल्ली विश्वविद्यालय की निदेशक पायल मोगा सहित विश्वविद्यालय के अनेक संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, निदेशक, शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
संगोष्ठी के दौरान विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से आए शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने विषय के विविध आयामों पर सार्थक विचार-विमर्श किया तथा उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, समानता और वैश्विक उत्कृष्टता के लिए ठोस सुझाव प्रस्तुत किए।
