उत्तर प्रदेश
माहवारी स्वच्छता अपनाकर संक्रमण और सर्वाइकल कैंसर के खतरे को किया जा सकता है कम : डॉ. अंजू अग्रवालअंतर्राष्ट्रीय माहवारी स्वच्छता दिवस पर क्वीन मेरी में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
लखनऊ, 30 मई 2026
अंतर्राष्ट्रीय माहवारी स्वच्छता दिवस के उपलक्ष्य में शनिवार को क्वीन मेरी अस्पताल में नर्सिंग विद्यार्थियों द्वारा माहवारी स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया। इस अवसर पर पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से माहवारी स्वच्छता और उससे जुड़े महत्वपूर्ण संदेशों को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया।
“नुक्कड़ नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों ने माहवारी से जुड़े मिथकों को दूर करने, इस विषय पर खुलकर संवाद करने तथा माहवारी स्वच्छता अपनाने का संदेश दिया।”
इस अवसर पर प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. अंजू अग्रवाल ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि माहवारी स्वच्छता जननांग संक्रमण (Genital Tract Infections) तथा गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर (सर्वाइकल कैंसर) जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की रोकथाम के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सर्वाइकल कैंसर का संबंध कुछ संक्रमणों, विशेष रूप से एचपीवी संक्रमण, से होता है। उन्होंने बताया कि माहवारी शुरू होने की सामान्य आयु 9 से 14 वर्ष के बीच होती है। इसलिए 9 से 10 वर्ष की आयु से ही किशोरियों को इसके बारे में जागरूक करना आवश्यक है, विशेषकर तब जब उनमें किशोरावस्था की शुरुआत के संकेत दिखाई देने लगें, जैसे स्तनों का विकास होना और शरीर में अन्य शारीरिक परिवर्तन शुरू होना |
वर्तमान सामाजिक परिवेश को देखते हुए किशोरियों को सुरक्षित यौन व्यवहार (Safe Sex Practices) के बारे में भी शिक्षित किया जाना चाहिए। उन्हें अनचाहे गर्भधारण और यौन संचारित संक्रमणों से बचाव के उपायों की जानकारी दी जानी चाहिए। गर्भनिरोधक साधनों के बारे में सही जानकारी और कंडोम के उपयोग के महत्व को समझाना आवश्यक है।
इस अवसर पर चिकित्सक एवं Centre of Excellence for Adolescent Health की नोडल अधिकारी डॉ. सुजाता देव ने बताया कि किशोरियां एवं महिलाएं माहवारी प्रबंधन के लिए सेनेटरी नैपकिन, टैम्पॉन, मेंस्ट्रुअल कप, पीरियड पैंटी अथवा साफ कपड़े का उपयोग कर सकती हैं। हालांकि किसी भी विकल्प का उपयोग करते समय हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि सेनेटरी पैड या टैम्पॉन को हर 4 से 6 घंटे में बदलना चाहिए। यदि कपड़े का उपयोग किया जा रहा है, तो उसे साबुन और पानी से अच्छी तरह धोकर धूप में सुखाना चाहिए। मेंस्ट्रुअल कप का उपयोग 12 घंटे तक किया जा सकता है, लेकिन प्रत्येक उपयोग के बाद उसे साबुन और पानी से अच्छी तरह साफ करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि उपयोग किए गए पैड का सुरक्षित निस्तारण (Disposal) संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है। इस्तेमाल किए गए पैड को कागज में लपेटकर ढक्कन वाले कूड़ेदान में डालना चाहिए।
उन्होंने कहा कि किशोरियों और महिलाओं की सुविधा के लिए विद्यालयों, महाविद्यालयों, कार्यस्थलों तथा सार्वजनिक स्थानों पर पीरियड-फ्रेंडली शौचालयों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए, जहां स्वच्छ पानी, साबुन, निजी स्थान और सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था हो।
इस अवसर पर अन्य चिकित्सक, अस्पताल का स्टाफ, नर्सिंग के विद्यार्थी तथा आमजन उपस्थित रहे।
