धर्म-संस्कृति
हिंदू नूतन वर्ष 2083 एवं नवरात्रि..
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्रयंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते।
19 मार्च 2026 दिन गुरुवार को नवरात्रि एवं हिंदू नूतन वर्ष का आगमन हो रहा है।
नवरात्रि संस्कृत का शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘नौ रातें’। इन नौ रात्रों एवं दस दिनों में देवी दुर्गा/शक्ति के नौ स्वरूपों की पूजा अर्चना का विधान है।
नव संवत्सर का नाम ‘रौद्र’ नाम संवत्सर होगा, जिसमें राजा देव गुरु बृहस्पति और मंत्री पद पर मंगल देव विराजमान रहेंगे।
माता के आगमन की सवारी
देवी शक्ति का वाहन शेर होता है परंतु देवी जब भी पृथ्वी लोक पर विचरण करती हैं तो अलग वाहन पर सवार होकर आती है जोकि सप्ताह के दिनों पर निर्भर करता है। नवरात्र का प्रारंभ गुरुवार को होने से देवी दुर्गा पालकी पर सवार होकर पृथ्वी लोक में विचरण करेंगी। पालकी पर सवार होकर आने से सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से उथल-पुथल होने की अधिक संभावना, वैश्विक स्तर पर आर्थिक उतार-चढ़ाव, स्वास्थ्य तथा प्राकृतिक चुनौतियां भी देखने को मिलेंगी, वैश्विक स्तर पर राजनेताओं के मध्य वैचारिक मतभेद तथा तनाव होने की संभावना भी रहेगी।
देवी दुर्गा का प्रस्थान हाथी पर होगा जो की अच्छी वर्षा सुख शांति का प्रतीक है।

पूजा का शुभ मुहूर्त
19 मार्च 2026 को कलश स्थापना का समय प्रातः 06:53 से 10:14 तक है।
अभिजीत मुहूर्त 12:05 से 12:53 तक।
नवरात्रि तिथियां इस प्रकार रहेंगी
19 मार्च 2026 प्रथम नवरात्रि(प्रतिपदा तिथि क्षय)।
20 मार्च 2026 द्वितीय नवरात्रि।
तृतीया नवरात्रि 21 मार्च 2026, गौरी तृतीया।
22 मार्च 2026 चतुर्थ नवरात्रि, विनायक चतुर्थी।
23 मार्च 2026 लक्ष्मी जयंती, पंचम नवरात्रि।
24 मार्च 2026 छठी नवरात्रि, यमुना छठ।
25 मार्च 2026 सप्तम नवरात्रि।
26 मार्च 2026 दुर्गा अष्टमी,श्री रामनवमी।
संवत् 2083 में नवमी तिथि मध्याह्वव्यापिनी होने तथा 27 मार्च को उदय व्यापिनी पुनर्वसुयुता होने से जातकों के मन में संशय की स्थिति उत्पन्न हो सकती है अतः धर्म सिंधु के अनुसार–
अस्यां मध्याह्वव्यापिन्यामुपोषणं कार्यम्, पूर्वोद्युरेव मध्यान्हे सत्वे सैव ग्राह्या।।
(अर्थात उपवास तभी करना चाहिए जब तिथि मध्याह्न में व्याप्त हो, यदि पूर्व दिन ही मध्याह्न में वह तिथि विद्यमान हो, तो पहला दिन ही उपवास के लिए ग्रहण करना चाहिए।) अतः 26 मार्च 2026 को ही मध्याह्न में नवमी तिथि व्याप्त होने से नवमी उपवास तथा राम जन्मोत्सव 26 मार्च को ही मनाया जाना शास्त्र सम्मत है।

27 मार्च 2026 कन्या पूजन नवमी।
28 मार्च 2026 को दुर्गा विसर्जन, कलश विसर्जन।
पूजा विधि
ब्रह्म मुहूर्त में जागें नित्य कर्म से निवृत्त होकर स्नानादि करने के उपरांत संपूर्ण घर और पूजा स्थल को स्वच्छ करने के उपरांत घर में गंगाजल व गोमूत्र से छिड़काव करें व पूजा स्थल पर आसन ग्रहण करें। माता रानी को गंगाजल से स्नान करा, लाल वस्त्र एवं सोलह श्रृंगार अर्पित करें। स्वच्छ स्थान से मिट्टी लेकर, मिट्टी को चौड़े मुंह वाले बर्तन में रखें और उसमें सप्तधान्य बोएं।
-अब उसके ऊपर कलश में जल भरें और उसके ऊपरी भाग (गर्दन) में कलावा बांधें। आम के नौ पत्तों को कलश के ऊपर रखें। नारियल में कलावा लपेटे। उसके बाद नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के ऊपर और पत्तों के मध्य रखें। घटस्थापना पूरी होने के पश्चात् मां दुर्गा का आह्वान करें। घी का दीपक जलाएं कुमकुम, अक्षत, धूप, दीप नैवेद्य,फल अर्पित करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। घी के दीपक से मां दुर्गा की आरती करें। मां शैलपुत्री को गाय के दूध से बने हुए पकवानों का भोग लगाया जाता है। इसके अतिरिक्त मीठा पान अवश्य चढ़ाएं और गुड़ का भोग भी आप लगा सकते हैं।
सायं काल अपने घर के मुख्य द्वार पर नौ दीपक अवश्य जलाएं सभी कष्टों का नाश होगा।
संपर्क सूत्र
8395806256
