धर्म-संस्कृति
माघ पूर्णिमा 2026
01 फरवरी 2026 दिन रविवार को माघ पूर्णिमा का उपवास तथा स्नान दानार्थ पूर्णिमा भी 01 फरवरी 2026 को ही रहेगी।
धार्मिक मान्यतानुसार माघ पूर्णिमा पर सभी देवतागण देवलोक से पृथ्वी पर विचरण करते है व गंगा स्नान हेतु प्रयागराज आते हैं।
इसलिए माघ पूर्णिमा को गंगा स्नान को अति शुभ फल कारक माना जाता है।
माघ पूर्णिमा से शीत ऋतु समाप्त होकर ग्रीष्म ऋतु प्रारंभ होती है इसलिए भी माघ पूर्णिमा विशेष मानी गई है।
वर्ष 2026 की माघ पूर्णिमा अत्यंत ही शुभ फलदाई रहेगी क्योंकि माघ पूर्णिमा पर्व पर अनेक शुभ योगों का निर्माण हो रहा है– प्रीति योग, आयुष्मान योग,सौभाग्य योग, पुष्य नक्षत्र,तथा सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है l
मूहूर्त
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ 01 फरवरी 2026 प्रातः काल 05:55 से 02 फरवरी 2026 प्रातः काल 03:41 तक।
चंद्रोदय 01 फरवरी 2026 सायंकाल 05:56 पर।
पूजा विधि
नित्य कर्म से निवृत्त होकर घर व मंदिर को स्वच्छ कर ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान करें यदि संभव न हो तो घर पर ही गंगाजल डालकर स्नान कर सकते हैं। सूर्य के सम्मुख खड़े होकर सूर्य को तिल डालकर अर्घ्य प्रदान करें सूर्य देव को धूप दीप अर्पित करें। तत्पश्चात पूजा स्थल पर अखंड दीप प्रज्वलित करें। भगवान विष्णु को गंगाजल से स्नान कराकर आसन प्रदान करें। भगवान विष्णु को रोली, अक्षत कुमकुम, पीतांबर, पुष्प,दूर्वा, धूप, दीप अर्पित करें। सत्यनारायण की कथा का पाठ करें। भगवान विष्णु को भोग स्वरूप चरणामृत, पान सुपारी, पंचमेवा, पंच मिठाई, पंच फल, तुलसी के पत्ते एवं विशेष रूप से खीर का भोग अवश्य लगाएं।
घी की 11 बत्तियां जला कर भगवान विष्णु की आरती करें।
चंद्रोदय के समय चंद्रदेव को स्टील या चांदी के बर्तन से अर्घ्य प्रदान करें। स्टील के पात्र में चंद्रमा का प्रतिबिंब बनाकर रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन, धूप दीप, नैवेद्य अर्पित कर घी के दीपक से आरती करें और खीर का भोग लगाएं।
जिन जातकों का चंद्रमा कमजोर है नीच का है ऐसे जातकों को सफेद वस्तुओं का दान जैसे सफेद वस्त्र, चावल, चीनी, दही, घी, मोती, शंख, इत्यादि का दान करना अति शुभ रहेगा।
संपर्क सूत्र
83958 06256
